हे माँ काली मैं केवल तेरा लाल बनूँ
हे माँ काली वर देना मुझको
तेरे चरणों का में फूल बनूँ
जो गर टूटे भी तो माँ
तेरे चरणों में गिर जाये
न किसी प्रेमी माला में गुथे
और न ही नेताओं की
माला में गूथा जाये
फूल बनाना है तो माँ
बह केवल तेरे चरणों में ही चढ़ाया जाये
गर काँटा ही अगर बनाना है तो
माँ ऐसा मुझे बनाना तुम
जो गद्दारों को शूल नजर में आये
हे माँ जो तेरे दोषी हों
उनके उर को चीड़-फाड़ता जाये
हे माँ में केवल तेरा लाल बनूँ
जो माँ के दोषी हों
उनके खातिर बिकराल बनूँ
जो मात पिता को त्रासित कर दे
ऐसे गद्दारों का काल बनूँ
जो भी अत्याचारों से ग्रसित हो
ऐसे लोगों की मैं ढाल बनूँ
हे माँ काली वर देना मुझको
मैं माता-पिता का श्रवण सा लाल बनूँ
दुर्गेश कुमार सराठे
जय माँ काली
ReplyDeleteजय माँ काली
Deleteभाई साहिब, माँ से मेरी प्रार्थना है यह तो