खुले छोड़ दो अब मोदी जी
खुले छोड़ दो अब मोदी जी,
भारत माँ के उन बीरों को|
ताकि मसल पायें हम,
आतंकवाद के इन कीड़ों को|
एक तरफ आतंकी पिल्ले हैं,
जो सेना पर पाहन खूब चलाते हैं|
और एक तरफ हमारी सेना है,
जो इन कुत्तो की ठोकर हँस करके सह जाते हैं|
एक सुअर को बांधा बोनट के ऊपर,
मानव अधिकारों का खुला उल्लंघन होता है|
पर जब सेना पर पत्थर चलते हैं,
तब क्यों न इसका खंडन होता है|
जब आतंकी पिल्लों पर गोले दागे जाते हैं,
तब भारत के कुछ बंधु काहे शोक मनाते हैं|
धिक्कारित हैं ऐसे कायर जो,
अपने घर में आतंकी लोगों को खूब छिपाया करते हैं|
इन कायर लोगों से पूछो,
जब सीमा पर सैनिक अपने प्राण गवाते हैं|
तब इन कायर लोगों में से कितने,
उनकी इस वीर सहादत को अपना शीश झुकाते हैं|
📖गीतकार 📖
दुर्गेश कुमार सराठे
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