प्रेम वेदना

हम नहीं चाहते यह जीवन,
पुष्पकली सा कौमल हो|
हम नहीं चाहते इस जग में,
किसी और से मोह प्यार का लोभन हो|
अगर कहीं चलो तुम राह के उन काटो पर,
तब उन काटों के ऊपर उर का रक्त हमारा हो|
अगर पड़े जरूरत तुम्हें किसी के प्राणो की,
तब यह वलिदान हमारा हो|
हम नहीं चाहते ऐसा कुछ जिसमें मलिन नाम तुम्हारा हो
हे मां काली वर देना मुझको,
न किसी और से मोह प्यार का लोभन हो|
यह जग क्या मिटा सकेगा मुझको,
जो खुद ही क्षणभंगुर है|
मैं लड़कर इन जहरीले सर्पों से,
क्या यूं ही मर जाऊगा|
यदि कहीं इन बिगड़ों के संघर्षों से,
अंत हमारा होता है|
तब भी मर के इन बिगड़ों को,
छिन्न-भिन्न सा कर जाऊगा|
अगर मरना ही पड़े मुझे इस जीवन मे,
तब आंखों मैं पटचित्र तुमारा हो|

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