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Showing posts from February, 2018

गीत

होली का त्यौहार आया मगर, होली दिल में समाई नहीं होली का रंग चढ़ा ही नहीं ,दूरी की दिल में पुरवाई रही मन मुटाव तो भूले मगर, पर दिल की कसक मिटाई नहीं होली का रंग भी फीका पड़ा,दिल मे...

Fray fish

I was coming home from the institute at four o'clock in the evening, then a strange incident happened with me. when I left the institute, my two friends with me were Ashutosh Acharya and Rishi Agarwal, rishi bhai took S.R.4, Leaving me and ashutosh. SR8 our bus had some time to come.so, we went for tea. then we came to bus stop.there, we me met tarun bhai,who lives nearby me, ,bus came and Ashubhai got on his stops. Me and tarun got of the bus at 1100 residence, we had to take t.r.1 from here. Then we came and sat on our bus stop. Two buses left before us. we decided to sit there and talk until the next bus arives. The young brother's eye suddenly fell on a fish lying on the road. And  trun brother shouted - Durgesh brother fish, how  is the fish on the road ?we were shocked. I asked the young brother where is it? He said, while showing his hand over there ..., then what do I see that the fish was in agony? Due to being ...

दिलों में दरार पड़ गई

कितने सपने सजा रखे थे आँखों में, न जाने वह कहाँ विखर गए| आश लगाये बैठी थी आँखें, न जाने वह पथ भी किधर गए| वगुले बहुत उड़े गगन में, असली शहर उजर गए| दो मीठे जल की नदियां क्यों, आपस में ...

लोकगीत

सखी संईया तो पउआ फसात है दारू बैरन खाय जात है दिन भर तो जो पउआ पीवे दारू में जो दिनभर जीवे अरी रात में जो हल्ला मचात है दारू बैरन खाय जात है ऐसों मचावे हल्ला गुल्ला जाहे सुन उठ ...

बूढ़ी माँ

सड़क पर निकलते ही एक राह दिखाई देती है एक चूल्हा कुछ आँटा गूँथे एक बूढ़ी माँ बैठी है न जाने कहाँ से वह वेचारी आटा माँग-माँग कर लाई है दर-दर पर गई होगी न जाने कितनों से ठोकर खाई ह...

गाड़ीबान

वर्तमान भारतीय राजनीति की स्थिति उस अस्त-व्यस्त बैलगाड़ी के जैंसी हो गई है। जिसमें जुते बैलों में से एक बैल(राजशाही) भूखा है,तो दूसरा बैल (नौकरशाही) लंगड़ा है। गाड़ी के दोनों पहिये (न्याय) टूट रहे हैं।                 गाड़ीवान बस हकनी चलाए जा रहा है। न उसे बैलों की स्थिति पता करनी है। और न ही गाड़ी के पहिये ही दुरुस्त करना चाहता है। इधर पहिये अपनी धुरी से इधर-उधर खसकते नजर आ रहे हैं। उधर बैलों की नाथ और रस्सी दोनों जर्जर हो चुके हैं। जिससे दोनों बैल अनियन्त्रित हो गए हैं। उन पर गाड़ीवान का नियंत्रण कमजोर होने से दोनों अलग-अलग दिशाओं में भाग रहे हैं।                   इसी खींच-तान में गाड़ी के पहियों के ऊपर से लोहे का छल्ला (पाँत) उतर गया है। जिससे दोनों पहिये कुंद हो गए हैं। अब उन्हें मरम्मत की आवश्यकता है। गाड़ी हस्त-व्यस्त हो चुकी है। स्थिति इतनी बुरी हो गई है,फिर भी गाड़ी में इतने अधिक लोग सवार हैं कि उनके वजन से पूरी गाड़ी चरमरा रही है। लोग केवल गाड़ी पर लदते जा रहे हैं। कोई गाड़ी की स्थिति सुदृढ़ न...

लक्षण कुत्तों जैंसे दे दिए, सूरत दी इंसान की

लक्षण कुत्तों जैंसे दे दिए,सूरत दी इंसान की लीला बढ़ी गजब है यारो,मेरे उस भगवान की बात-बात पर भौतई भूखे,व्यवहार हुए सब रूखे रूखे चाल ढाल सब कुत्तों की है,पर सूरत है इंसान की ल...

तड़पती मछली

आज शाम चार बजे में संस्थान से घर आ रहा था, तब मेरे साथ एक अजीब घटना घटी| हुआ यूँ कि जब  मैं संस्थान से निकला तब मेरे साथ मेरे दो मित्र आशुतोष आचार्य व ऋषि अग्रवाल थे,ऋषि भाई एस आर ...