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Showing posts from 2017

अरे अठारह स्वागत है तेरा

नये बर्ष तू आया है इन शीतलता लिये बहारों में स्वागत है तेरा अरे अठारह मेरे मन के फुलवारों में तू आशा की नई किरण वन बिखरजा सूने गलियारों में निराशित मन में तू आशा भर दे टूट चु...

कह देना

कोई शिकायत गर उर में हो कोई बात अगर अधर में हो लग गई हो कोई बात अगर उर में दंस मार रही हो अगर जिगर में तब कह देना तुम छन्दों को पढ़कर शिकायत कर सकते हो तुम तनकर कुछ दिन शेष बचे है...

21वी शदी का प्रभाव

स्नेह विरक्त हुआ अब हृदय वह मधुर सम्बन्ध कहाँ है यह  21वी  शदी है यारो अब वह प्रेम के बंध कहाँ है लोगों के हृदय में कटुता है मन में छल के भाव हैं नयनों से लज्जा गायब है मर्यादा क...

शिक्षक

इस अंधकारमय दुनिया में शिक्षक सूरज साकार स्वयं  तपता है जग में औरों को देता आकार स्वयं कभी न सोचे अपनी स्वय सपनों को हृदय में रखकर औरों के सपने करता साकार स्वयं तपता है जग म...

कब मेरा वह गाँव आये

यह दिल भी गीत गाता है कब मेरा वह गाँव आये वह कहानी सुनने वाला मतभेद रहित अलाव आये यहाँ पर बगुले बहुत हैं कब हँसों का वह ठाँव आये यहाँ छाया में भी तपन है कब पीपल की वह छाँव आये व...

जीवन का श्रृजन

गेहूँ के नवांकुर देख हृदय में आया कैंसे जीवन का श्रृजन होता है सूरज जीवन को उज्जवलता देता धरती के उर से पैदा होता है पानी से वह शीतलता ग्रहण कर नमी हृदय में भरता है भांति-भा...

नया साल

यह गया एक बर्ष हमारा इसका विश्लेषण कर ले आगे क्या करना है अब उसका तू अन्वेषण कर ले क्या खोया क्या पाया है इसका तू मंथन कर ले यह बर्ष लौटकर  न आयेगा जिसको हमने आज गवाया है अरे य...

मैंने भी लिखना चाहा प्रेम गीत

मैंने भी लिखना चाहा प्रेम गीत पर आँखों में करूणा क्यों आई मैंने तो मन में श्रृंगारी भाव रखा पर करूणा की अनुभूति आई सायद करूणा बैठ गई है हिय में पूरे मन पर केवल उसकी परछाई मै...

आओ चलें

""""""""""""""""""""""""जय माँ काली"""""""""""""""""" इस अंधकार की दुनिया से आओ बाहर को धरें कदम ----------------------------------------------------------- यह हमारी मंजिल थोड़े है यहां आकर क्यों रुक गए हम ------------------------------------------------------------ चारों तरफ अंधेरा है यहाँ तो चलो वहाँ जहाँ ...

कुछ नहीं है खुद को सभ्य बनाने में

""""""""""""""""""""""Jay MA kali"""""""""""""""""" खाली पानी की बूंदे छिड़को तन पर मत  नहाया  करो  इस  जमाने में ठंड बहुत हैं यारो अभी  यहाँ पर जान निकल जाती है यार नहाने में पीटर दी ग्रेट से बन जाओ अब तो कुछ नहीं है खु...

हे भगवान बनवा दो पटवारी

पढ़े लिखे ठलुओ को खुश खबरी आई भारी सबरे कह रह हे भगवान हमे अब तो बनवा दो पटवारी बहुत दिनों से बैठे थे खत्म हुई इंतजार की पारी हे भगवान अब तो हमें बनवा दो पटवारी अतिथि शिक्षक ब...

कुण्डलिया छन्द

बड़े-बड़े सब शासन कर रहे, ऐसी जा बेईमानी नेता सबरे राजा हो गये, जनता भर रही पानी जनता भर रही पानी, लोकतंत्र का कैंसा खेल परिभाषा पलटी लोकतंत्र की, यह कैंसा वेमेल कह दुर्गेश लो...

मुझे क्या बना डाला

ये जिंदगी मैंने तुझसे क्या मांगा था तूने मुझे क्या दे डाला अच्छा खासा मिलनसार था तूने एकांत बासी कैंसा मुझे बना डाला पहले खिला-खिला रहता था जो दिल में होता कह देता था पर तू...

चाय

यह एक चाय दिलों को जोड़ा करती है यह एक चाय द्विवेषो को तोड़ा करती है यह एक चाय रसानंद का रुख मोड़ा करती है यह एक चाय टूटे हुए को जोड़ा करती है कभी बैठकर तो पियो मित्रों के संग ...

यार जब हम बड़े हो जायेंगे

यह दोस्तों का बुद्धू कहना हर वक्त एक दूजे की टांग खींचते रहना यह एक दूजे को हर कुछ कह देना दोस्त के हाथों से पानी की बॉटल छीन कर पानी पी लेना दोस्त अगर पानी की बॉटल लाये मगर उस...

चिड़िया

एक चिड़िया एक दिन मेरे आँगन में आई पता नहीं वह मुझे देखकर क्यों विचकती पंख फड़फड़ाई सायद वह मुझे देखकर डर गई थी पर उसने अपनी चालाकी पूरी-पूरी मुझे दिखाई जब मैं उसे दाना देन...

पेड़ की व्यथा

अरे भइया मेरो का दोष हतो, जो तूने मोहे निपटा दओ| मैंने तोहे मोड़ा-मोड़ी समझो, तू मेहे काट-कूट के ले गओ| मैनें तोहे अपने फल दे दये, तू पत्ता तक ले गओ| तूने मेरी लकड़ी काटी, और अब जड़े ...

क्या कहूँ मैं अपने मन से?

क्या कहूँ मैं अपने मन से बड़ा उदास हुआ जाता है जब देखो तब न जाने क्यों बड़ा हतास हुआ जाता है आज तो मैं डूब गया हूँ न जाने कौन सा गम है यहाँ पर दुख का सागर है मीठे जल की नदियाँ कम ह...

बचपन का मित्र

कभी -कभी ऐसा भी होता है बर्षों के समय निकलने पर वह बचपन का प्रिय मित्र इन आँखों के सम्मुख होता है तब आंखे हर्षित हो जाती है हृदय में कली बर्षा होती है मन भी मीन बना होता है जब वह...

मित्रों का होना

ज़िन्दगी जीने के लिए एक मित्र जरूरी होता है मिल पायें अच्छे मित्र ऐसा कभी-कभी ही होता है मतलब की खातिर मित्र बनाने वाले क्या जाने याराना क्या होता है निश्वार्थ भाव से औरों ...

माता-पिता

मैंने देखा इस जग में झूठे लोगों को, जो माया के पीछे सब कुछ छोड़ जाते हैं एक प्रेमिका के चक्कर में अपने माता पिता से रिश्ता तोड़ जाते हैं जिसने भी ऐसा कुकृत्य क्या, व लोग अक्सर ...