चाय
यह एक चाय
दिलों को जोड़ा करती है
यह एक चाय
द्विवेषो को तोड़ा करती है
यह एक चाय
रसानंद का रुख मोड़ा करती है
यह एक चाय
टूटे हुए को जोड़ा करती है
कभी बैठकर तो पियो
मित्रों के संग एक चाय
यह शत्रु को भी
मित्रों में जोड़ा करती है
जब भी हम मित्रों के संग
एक जगह साथ बैठकर
किसी एक चौराहे पर
चाय पिया करते हैं
तब यह एक चाय
उन मित्रों के मध्य
आनंदभाव बनकर
दौड़ा करती है
यह एक चाय
टूटे प्याले को जोड़ा करती है
यह एक चाय
जाति-पांति के सब बंधों
को तोड़ा करती है
यह एक चाय
भाषाओं से भाषाओं को
जोड़ा करती है
यह एक चाय
ऊंच-नीच का
गला मरोड़ा करती है
जरा एक साथ बैठकर
पीकर देखो एक चाय
यह दिलों से दिलों को
जोड़ दिया करती है
यह एक चाय.........
दुर्गेश कुमार सराठे
Aao kbhii piyee chae.... Sath me Toh phrr
ReplyDeleteबिल्कुल सर बिल्कुल
DeleteMilo kbhi phir चाय पीते hai
ReplyDeleteये बात है तो
बिल्कुल सर कभी मिलते हैं
ReplyDeleteचाय चाय चाय
ReplyDeleteचाय की चाह क्या गजब की चाय
DeleteWaah durgesh
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