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चिमनी

एक दिन न्यूज पेपर में एक घटना छपी थी,कोई प्रेम प्रसंग की घटना का उद्धरण था| जैंसा आज कल आम हो चला है| हर चौथे व्यक्ति को किसी ना किसी से प्रेम है,अब प्रेम का मतलब कितने जानते हैं| वह ईश्वर ही जाने,पर फिल्मीप्रेम जन-मन में खूब पुष्पित-फल्लवित हो रहा है| जहाँ वासना के अतिवाद को प्रेम का जामा पहना कर जनमानस के समक्ष प्रर्दशित कर दिया जाता है| और जब यह वासना प्रेम की जगह पूज्यनीय हो जाती है,तब अखबार में छपने लायक खबरों का उत्सर्जन होता है| ऐसी ही एक घटना उसदिन पेपर में छपी थी| और प्रत्येक पाठक प्रेम को खूब खरी खोटी नजरों से देख रहा था| अब घटना क्रम ही ऐसा था कि प्रेम जैंसे आत्मीय बिषय पर कलंक का काजल पोता जा रहा था और प्रेम स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहा था| सोच रहा था कि आज मानव कितना अमानवीय हो चला है| जहाँ मेरी लेशमात्र भी उपस्थिति नहीं वहाँ मुझे जबरन थकेल कर अपराधी ठहराया जा रहा है| एक छोटा सा गाँव था,जहाँ विभिन्न जाति वर्गों के लोग रहते थे| अब गाँव तो गाँव होता है,विल्कुल अपनी मस्ती में मस्त| अल्हणता का परिचायक,लोगों में आपसी प्रेमभाव भी प्रबलता लिये| किंतु गाँव जितना प्रगतिवादी नही...