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अप्रत्याशित

अप्रत्याशित कहानी एक पक्षी के दुखद जीवन की एक दिन सुबह 6 बजे अपने घर के आँगन में प्रातः कालीन सूर्य की लालिमा को निहारे जा रहा था| बिना किसी पूर्वयोजना के...... बस प्रातः काल के अन...