मैं भारत का सूरज हूँ।
मैं भारत का सूरज हूँ, अंधयारे से डरता हूँ। बांध रखा है तम ने मुझको, भय से रोज विचरता हूँ। जकड़ रखे हैं पाँव किसी ने, कहीं कलाई बौनी है। जिह्वा पर है जोर किसी का, काटों की कहीं बिछौनी है। क्रंदन करती मेरी किरणें, धूप दर्द की वाहक है। नहीं मिटेगा अंध यहाँ का, जिसका पुंज सहायक है। बैंसे भी तो कम दिखता हूँ, ऊपर से बादल छा जाते हैं। डसने पंथ कौम ओ जाति, हर...