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Showing posts from December, 2017

अरे अठारह स्वागत है तेरा

नये बर्ष तू आया है इन शीतलता लिये बहारों में स्वागत है तेरा अरे अठारह मेरे मन के फुलवारों में तू आशा की नई किरण वन बिखरजा सूने गलियारों में निराशित मन में तू आशा भर दे टूट चु...

कह देना

कोई शिकायत गर उर में हो कोई बात अगर अधर में हो लग गई हो कोई बात अगर उर में दंस मार रही हो अगर जिगर में तब कह देना तुम छन्दों को पढ़कर शिकायत कर सकते हो तुम तनकर कुछ दिन शेष बचे है...

21वी शदी का प्रभाव

स्नेह विरक्त हुआ अब हृदय वह मधुर सम्बन्ध कहाँ है यह  21वी  शदी है यारो अब वह प्रेम के बंध कहाँ है लोगों के हृदय में कटुता है मन में छल के भाव हैं नयनों से लज्जा गायब है मर्यादा क...

शिक्षक

इस अंधकारमय दुनिया में शिक्षक सूरज साकार स्वयं  तपता है जग में औरों को देता आकार स्वयं कभी न सोचे अपनी स्वय सपनों को हृदय में रखकर औरों के सपने करता साकार स्वयं तपता है जग म...

कब मेरा वह गाँव आये

यह दिल भी गीत गाता है कब मेरा वह गाँव आये वह कहानी सुनने वाला मतभेद रहित अलाव आये यहाँ पर बगुले बहुत हैं कब हँसों का वह ठाँव आये यहाँ छाया में भी तपन है कब पीपल की वह छाँव आये व...

जीवन का श्रृजन

गेहूँ के नवांकुर देख हृदय में आया कैंसे जीवन का श्रृजन होता है सूरज जीवन को उज्जवलता देता धरती के उर से पैदा होता है पानी से वह शीतलता ग्रहण कर नमी हृदय में भरता है भांति-भा...

नया साल

यह गया एक बर्ष हमारा इसका विश्लेषण कर ले आगे क्या करना है अब उसका तू अन्वेषण कर ले क्या खोया क्या पाया है इसका तू मंथन कर ले यह बर्ष लौटकर  न आयेगा जिसको हमने आज गवाया है अरे य...

मैंने भी लिखना चाहा प्रेम गीत

मैंने भी लिखना चाहा प्रेम गीत पर आँखों में करूणा क्यों आई मैंने तो मन में श्रृंगारी भाव रखा पर करूणा की अनुभूति आई सायद करूणा बैठ गई है हिय में पूरे मन पर केवल उसकी परछाई मै...

आओ चलें

""""""""""""""""""""""""जय माँ काली"""""""""""""""""" इस अंधकार की दुनिया से आओ बाहर को धरें कदम ----------------------------------------------------------- यह हमारी मंजिल थोड़े है यहां आकर क्यों रुक गए हम ------------------------------------------------------------ चारों तरफ अंधेरा है यहाँ तो चलो वहाँ जहाँ ...

कुछ नहीं है खुद को सभ्य बनाने में

""""""""""""""""""""""Jay MA kali"""""""""""""""""" खाली पानी की बूंदे छिड़को तन पर मत  नहाया  करो  इस  जमाने में ठंड बहुत हैं यारो अभी  यहाँ पर जान निकल जाती है यार नहाने में पीटर दी ग्रेट से बन जाओ अब तो कुछ नहीं है खु...