अरे मैं एक समोसा जरूरत पड़ने पर सब लोगों की क्षुधा शांत करता औरों की खातिर मैं जब देखो तब स्वयं ही मरता लैकिन फिर भी देखो दोषी मैं ठहराया जाता है सब लोगों को पता है मैं हानिक...
अरे पहले स्वयं तो बदलो दुनिया फिर स्वयं बदलती जायेगी पहले तुम रसखान बनो सारी दुनिया परिवार नजर में आयेगी तुलसी के तुम दोहे बनकर तो देखो मीरा के पद में घुलकर तो देखो सारी श्...
हे माँ केवल मेरी गुस्ताखी को जो देखो वह चित पर धरता है खुद की गुस्ताखी को न देखे पर मेरी एक छोटी-सी गलती पर जो देखो वही बड़ा अकड़ता है गलती चाहे उनकी ही हो पर शिकायत मेरी करता है जो देखो वही शिकायत करता है माना कि मैं थोड़ा अड़ियल हूँ आसानी से न माने ऐसा पत्थर बड़ा अचल हूँ पर बाहर कितनी भी सख्ती बरतुँ पर माँ तुम्हें पता है मैं तो तेरी पूजा का नरियल हूँ मैं भले किसी को त्रास न दूँ पर हर कोई मुझे त्रासित करता है जो देखो वही शिकायत करता है क्या माँ यह मेरा भोलापन है या फिर दुनिया का अपनापन है पर इस दुनिया ने फूल दिखाकर काँटा मुझे दिया हरदम और दुनिया को लावण्यमयी समझे दुनिया से प्रेमास लगाये बैठे थे हम यहाँ हर कोई केवल लोगों को अपने झूठे मोह में डुबाने का प्रयास करता है जिसे देखो वही मुफ्त का खाने का प्रयास करता है माँ यह दुनिया गजब बनाई तूने जो वेचारे असहाय हैं हर कोई पागल उसे सताने का प्रयास करता है यहाँ बिना हाथ वाले काम करने में लगे हैं और हाथ है जिनके बह औरों से आस करता है हे माँ लोग अपनी देखते नहीं खुद आखिर क्या हैं औरों को देखने में लगा ह...
हे माँ काली वर देना मुझको तेरे चरणों का में फूल बनूँ जो गर टूटे भी तो माँ तेरे चरणों में गिर जाये न किसी प्रेमी माला में गुथे और न ही नेताओं की माला में गूथा जाये फूल बनाना है त...
जिसने कभी बात न की हो कभी न रुख किया हो सम वे आकर कहते हैं अब और दुर्गेश कैसें हो तुम यह सब जो बदलाव है लगता है चुनाव है कभी न ऐसे पास में बैठे हमेशा लगता था जैंसे हो ऐंठे कभी निक...
आज का युवा फैसन में ऐसा खोया है, पता नहीं जागा है कि सोया है पाश्चात्य संस्कृति को आदर्श मानकर, अश्लीलता को सभ्य जानकर इस मृगतृष्णा सी अंधी बाहकता में न जाने क्यों अंधों सा ...
वह जीवन ही क्या जिसमें, जख्मों का अंबार नहीं| जिस दिल में बासना नर्तन करती हो, उस दिल में सच्चे वाला प्यार नहीं| जिसे देख पुलकित न हो उर, ऐसा भी कोई श्रृंगार नहीं| जो मिटा न पाये ...
बह बचपन के मधुर पल बचपन में खूब मचाया बह कोलाहल नादानी में किये ऊधम अविरल इन्हें याद कर मन मेरा भी है यूँ उत्कल यह सब न जाने कहाँ गए हैं पता नहीं अब कहाँ हैं बचपन के मेरे बह स्व...
मर कर भी मैं ज़िंदा हूँ, मुझे निशदिन ही मरना है| मर कर ही तो फिर आगे, उच्च शिखर पर चढ़ना है| कुछ देखे जो जीवित पर मरे हुए, ऐसे मृत लोगों में अमृत प्रवाहित करना है| मर कर भी जो नहीं मर...
क्या मिटा सकेंगे हमको यह, दुश्मन मानवता के| रंगभेद,समाजभेेद,जातिबाद,भाषाबाद, और पुजारी निर्ममता के| मानवता के इन चण्डालों को, जड़ से रहित हमे अब करना है| ये क्या हमे अब रोक सक...
न जाने कहाँ गुम हो गए हो तुम, उस दिन के बाद दिखे नहीं हो तुम| दोस्त ऐसे न जाना था तुम्हें, जाने से पहले बता तो देते हमें| जब भी तुम्हें हम याद करते हैं, न जाने क्यो खुद को बढ़ा मतलबी ...
अब कैसा पिछड़ा देश रे, अब कैसा विखरा देश रे| जहाँ बसते थे सारस से पक्षी, सिंहो से उज्जवल थी यह धरती| नदियों की कल-कल करती गर्ती, गाँवों की वह तन्मय परती, कुछ भी रहा न शेष रे, कैसा वि...
हे माँ काली वर देना मुझको, मेरे उर में उपकारी वह भाव रहे| मैं मिट जाँऊ पर इस जग में, कष्टों की न कोई बयार रहे| मिट कर भी मेरे उर में, औरों की खातिर केवल प्यार रहे| हमेशा चलता जाऊ जीव...
प्रेम होवे तो घनानंद सम, हर पद में सुजान नाम लीन्हो है| महिमा बढ़ाई है सनेह की, प्रेम को पूजा सिध्द कीन्हो है| सनेह को गंगा की निर्मल धार दी, केवल सुजान को `स्वजान' सम कीन्हो है| स...
कभी हमारी गलती पर, मित्रों का हमें समझाना| कभी रूठ जाने पर, मित्रों द्वारा प्रेम से हमें मनाना| किसी बात को लेकर, हल्ला खूब मचाना| गलत राह पर पाँव बढ़ाने पर, मित्रों द्वारा सही ...
खुले छोड़ दो अब मोदी जी, भारत माँ के उन बीरों को| ताकि मसल पायें हम, आतंकवाद के इन कीड़ों को| एक तरफ आतंकी पिल्ले हैं, जो सेना पर पाहन खूब चलाते हैं| और एक तरफ हमारी सेना है, जो इन कु...
छोड़ विलापी क्रन्दन को अब, भर सीने में हुनकार उठो| अपनी अस्मिता की खातिर, भ्रष्टों को ललकार उठो, कब तक सहलें हम इन भ्रष्टों को, चरम अवस्था को आज भुलाई है, करी अतकारी हम लोगों सं...
न तेरा कसूर है, न मेरा कसूर है| मैं तुझसे दूर हूं, तू मुझसे दूर है| यह दूरिया होना तो, कुदरत का दस्तूर है| न मैंने चाहा था यह, न तूने चाहा होगा| वही होगा जो, उसने लिक्खा होगा| पर बिछुड...
ये जाने वाले पवन हिलोरे, उनसे मेरा प्यार कहियो जी| भौत दिनों से टूटे, दिल के तार कहियो जी| सूखी डाल सी हो गई प्यारी, अंखियो से अश्रुधार बहावो जारी| सावन में बरखा को, इंतज़ार कहिय...
हम नहीं चाहते यह जीवन, पुष्पकली सा कौमल हो| हम नहीं चाहते इस जग में, किसी और से मोह प्यार का लोभन हो| अगर कहीं चलो तुम राह के उन काटो पर, तब उन काटों के ऊपर उर का रक्त हमारा हो| अगर पड...
खुश नसीब होते हैं वे, जिन्हें अपनों का साथ होता है| यह दुनिया जन्नत से कम नहीं, जब सर पर किसी अपने का हाथ होता है| अक्सर प्यासे को पानी अमृत लगता है, वरना जो प्यासा नहीं उसे कहां ए...
तम्बाकू को ऐसे न चबाया करो, मौत को यू न बुलाया करो| तम्बाकू के खाने से जाने गयीं, तुम जान को यूं न बहाया करो| तम्बाकू को ऐसे न चबाया करो, मौत को यूं न बुलाया करो| है मौत का दूजा नाम य...
मैंने देखा जब एक बार, बचपन मरता धुआँधार | छूट गई विद्या अध्ययन की बेला, बचपन कार्य कर रहा अकेला| जहाँ इस पल में बालक विद्यालय को जायें, बहां वह बचपन भैस चराये| हाय भाग्य तेरी यह ल...