मर कर भी मैं ज़िंदा हूँ

मर कर भी मैं ज़िंदा हूँ,
मुझे निशदिन ही मरना है|
मर कर ही तो फिर आगे,
उच्च शिखर पर चढ़ना है|
कुछ देखे जो जीवित पर मरे हुए,
ऐसे मृत लोगों में अमृत प्रवाहित करना है|
मर कर भी जो नहीं मरा,
उसे निश्चित ही अवरोधों से लड़ना है|
जीवन मरने से कम थोड़े है,
मरना तो केवल है एक
जीवन में हर पल मरना है|
जीवन कोई सुखमय द्रव्य नहीं,
यह तो दावानल का एक झरना है|
कठिन परिश्रम ही जीवन है,
आराम क्षेत्र ही तो मरना है|
आलस्य का यहाँ पर स्थान नहीं,
जीवन में केवल मेहनत बस करना है|
जो मरते हैं पर जीवित रह कर,
वह आगे चलकर महान हुए|
पर जो दुखमय हो मृत हो गए,
वह जिन्दा रहकर भी कंगाल हुए|
ऐसे दुख से ग्रसित कंगालों को,
फिर से सुख से लावित करना है|

गीतकार
दुर्गेश कुमार सराठे

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