मित्र

कभी हमारी गलती पर,
मित्रों का हमें समझाना|
कभी रूठ जाने पर,
मित्रों द्वारा प्रेम से हमें मनाना|
किसी बात को लेकर,
हल्ला खूब मचाना|
गलत राह पर पाँव बढ़ाने पर,
मित्रों द्वारा सही राह बतलाना|
पानी पीते पीते हमसे,
पानी की बॉटल छीन के ले जाना|
कभी-कभी क्रोधित होकर,
स्नेह भाव जतलाना|
अगर मोबाइल में भिड़े रहें तो,
मोबाइल छीन-छान के ले जाना|
हमेशा कॉलेज से आने पर,
एक दूजे को साथ में लाना|
आगे हाथ बढ़ाने पर,
सीने से लपटाना|
साथ-साथ में चलते-चलते,
एक दूजे को पेंच लगाना|
एक छोटी-सी बात को लेकर,
आपस में भिड़ जाना|
और फिर भिड़ने पर भी,
एक दूजे को खूब हंसाना|
सही कहूं तो दुर्लभ है,
ऐसे मित्रों का मिल पाना|
मित्रों में यह सब बातों होतींं हैं,
इसी लिए तो उन्हें याद कर,
यह आँखे भी रोती हैं|
📖गीतकार 📖
दुर्गेश कुमार सराठे

Comments

Popular posts from this blog

चिमनी

बचपन का मित्र

हे भगवान बनवा दो पटवारी