हे माँ काली वर देना मुझको

हे माँ काली वर देना मुझको,
मेरे उर में उपकारी वह भाव रहे|
मैं मिट जाँऊ पर इस जग में,
कष्टों की न कोई बयार रहे|
मिट कर भी मेरे उर में,
औरों की खातिर केवल प्यार रहे|
हमेशा चलता जाऊ जीवन में,
न मेरे मन में कोई ठहराव रहे|
क्या पता कब मिट जाऊ माँ,
पर माँ तेरे मन में मेरी खातिर प्यार रहे|
नहीं पता मुझे इस जग में,
कब क्या घटने वाला है?
नहीं जानता इस जीवन में,
कब कौन मिले? और बिछुड़ने वाला है|
नहीं जानता माँ इस जग में,
मेरा क्या होने वाला है?
पर मुझे पता है इस जीवन में,
मुझे कई कष्टों से लड़ना है|
हे माँ काली मुझे साहस देना,
मुझे इन कष्टों को हरना है|
हे माँ काली वर देना मुझको,
मेरे जीवन में न यहम् भाव रहे|
गीतकार
दुर्गेश कुमार सराठे

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