चिमनी

एक दिन न्यूज पेपर में एक घटना छपी थी,कोई प्रेम प्रसंग की घटना का उद्धरण था| जैंसा आज कल आम हो चला है| हर चौथे व्यक्ति को किसी ना किसी से प्रेम है,अब प्रेम का मतलब कितने जानते हैं| वह ईश्वर ही जाने,पर फिल्मीप्रेम जन-मन में खूब पुष्पित-फल्लवित हो रहा है| जहाँ वासना के अतिवाद को प्रेम का जामा पहना कर जनमानस के समक्ष प्रर्दशित कर दिया जाता है| और जब यह वासना प्रेम की जगह पूज्यनीय हो जाती है,तब अखबार में छपने लायक खबरों का उत्सर्जन होता है| ऐसी ही एक घटना उसदिन पेपर में छपी थी| और प्रत्येक पाठक प्रेम को खूब खरी खोटी नजरों से देख रहा था|
अब घटना क्रम ही ऐसा था कि प्रेम जैंसे आत्मीय बिषय पर कलंक का काजल पोता जा रहा था और प्रेम स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहा था| सोच रहा था कि आज मानव कितना अमानवीय हो चला है| जहाँ मेरी लेशमात्र भी उपस्थिति नहीं वहाँ मुझे जबरन थकेल कर अपराधी ठहराया जा रहा है|
एक छोटा सा गाँव था,जहाँ विभिन्न जाति वर्गों के लोग रहते थे| अब गाँव तो गाँव होता है,विल्कुल अपनी मस्ती में मस्त| अल्हणता का परिचायक,लोगों में आपसी प्रेमभाव भी प्रबलता लिये| किंतु गाँव जितना प्रगतिवादी नहीं हुआ है उससे कहीं रूढ़ीवादी अधिक है| छुआ छूत,ऊँच-नीच भले समाप्त होने की कगार पर है किंतु गाँवों ने आज भी कलेजे से चिपका कर रखी हुई है| ऐसे ही गाँव में चिमनी और चिल्लू रहते हैं| चिमनी जहाँ एक किशोरी है,वहीं चिल्लू उसके ही हम उम्र किशोर है| दोनों एक ही मुहल्ले में रहते हैं,चिमनी घर का सारा काम करती है,चूल्हा चौंका सब उसके हाथ में है| वह सब कुछ करती है| गोबर उठाती है,उसे बाहर घूरे पर फेकने जाती है| मुहल्ले में एक सार्वजनिक नल है जिस पर वह पानी लेने जाती है| एक कुशल व्यक्तित्व की मालकिन है| इन सभी कामों से निपट कर बकरी चराने का काम भी वह करती है| उसने पढ़ाई लिखाई आठवी के बाद से ही छोड़ दी है| चिमनी एक निषाद की लकड़ी है| जिसकी आर्थिक स्थिति कुछ ठीक नहीं है| इसलिए चिमनी को घर बाहर का काम करना पड़ता है|
वहीं चिल्लू एक कुलीन वर्ग का लड़का है जो मोहल्ले में घूमता फिरता है| परिवार में रूपये पैसे की कोई कमी नहीं है| बाप दादाओं की पुश्तैनी जमीन जायदाद है,इसलिए उसे काम करने की जरूरत नहीं है| वह तो बस सुबह से शाम तक तेल कंघी करकर इस गली उस गली धूमता फिरता है| और उसका शरीर भी आकर्षक है,उम्दा गठीला बदन,लुभावन चेहरा मगर काया का ही सुन्दर है, भीतर गुणों का घड़ा रिक्त है| मगर यह दुनिया दिखावटी है तब उसे ज्यादा कोई दिक्कत परेशानी नहीं होती,भीतर झाँकता ही कौन है| लोग चेहरा देखकर मोहरा चलते हैं|
एक दिन चिमनी अपना सारा काम निपटा कर गोबर डालने घूरे पर जा रही थी|उसके एक हाथ में गोबर की छितरिया,और दूसरा हाथ कमर के ऊपर,हाँ मगर चिमनी हमेशा साज श्रृंगार करके ही घर से निकलती थी,कोई भी उसे देखकर धोखा खा सकता था| वह किसी सम्भ्रांत परिवार जैंसी किशोरी जान पड़ती थी|
वह गोबर फेक कर अपने घर जा रही थी,उसी समय चिल्लू अपनी मस्ती में गलियों में मटक रहा था| चिल्लू की नजर चिमनी पर पड़ी| चिल्लू उसे एकटक देखता ही रह गया| चिमनी ने उसके नयनसंदेश को अनदेखा करते हुए अपनी डगें बड़ा दीं| और घर निकल गई|
इधर चिल्लू के मन मष्तिक में चिमनी की छवि सदा सदा के लिए रम गई,वह हमेशा उसकेआस पास बने रहने का सफल प्रयास करता| अब आकर्षण होता ही ऐसा है| जो स्वतः अपनी ओर खींचता है| और किशोरावस्था होती ही ऐंसी है,जहाँ पग पग रपटीला होता है|
जब भी चिमनी अपने किसी काम से आती चिल्लू उसे निहारने का एक भी मैका नहीं छोड़ता, अब चिमनी भी कोई दूध पीती बालिका नहीं थी| उसने भी चिल्लू को बार बार देखा ही चिल्लू भी आकर्षक छोरा था| कहीं न कहीं दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते चले गए|
पहले जहाँ चिमनी एक बार पानी भरने जाती थी अब वह दो तीन बार पानी लाने जाती,गोबर फेकने जाती| आखिर वह दिन आ ही गया जब दोनों ने एक दूसरे से बात करना प्रारम्भ कर दिया| दोनों में बात चीत प्रारम्भ हो गई| अब पता नहीं प्यार का इजहार हुआ कि नहीं,मगर दोनों के मन में एक दूसरे के प्रति आकर्षण बहुत था| और यही आकर्षण आगे मुसीबत बनने वाला था|
दोनों में मेल मिलाप बहुत ज्यादा होने लगे,चिमनी बकरी चराने के बहाने घर से दिन दिन भर गायब रहती| और शाम होते बापस घर चली जाती| इस समयावधि में किसी को इनके बारे में भनक तक नहीं लगी|
समय बीतता गया एक दिन चिमनी की कुछ तबियत खराब हुई उसे डाक्टर के पास ले जाया गया जहाँ जाकर पता चला कि चिमनी गर्भिणी है| यह सूचना उसके परिवार में शोक की लहर बनकर दौड़ पड़ी| मामला गाँव का था| इज्जत का सवाल था,और बिन विवाही लड़की का गर्भिणी होना पाप ही समझा जाता है| सबसे पहले तो इस बात को वहीं दबाने की कोशिश की गई लेकिन जब मामला नहीं सम्भला तो खबर कानों फैल गई| मामला गाँव की पंचायत तक पहुंचा इसमें चिल्लू का नाम भी उछला चिमनी उसके साथ जीवन गुजारने के लिए तैयार थी,किंतु चिमनी एक अछूत लड़की और चिल्लू एक कुलीन वर्ग का लड़का,चिल्लू ने समाज के दबाव में चिमनी को अपनाने से इंकार कर दिया,उसने चिमनी के साथ किसी भी संबंध से पूरी तरह इंकार कर दिया| अब उनके संबंध की एक मात्र गवाह चिमनी और चिल्लू ही थे जिसमें चिल्लू ने साफ इंकार कर दिया,बची चिमनी तब उसका यकीन कौन करे|


दुर्गेश कुमार सराठे सजल 

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