माँ गंगा

जल मैया का अमृत सा है
इसे बचाने आयें हम

माँ गंगा ने हमें दिया है
जीवन का वरदान
कइयों की बह प्यास बुझाती
धरती का वह नव परिधान
तुंग हिमालय से चलकर माँ
फिर मैदानों में आती हैं
वह अपने सफर में हरदम
अपने बच्चों का पोषण करती जातीं हैं

माँ देतीं हमें मोक्षदान
जिसके कारण है देश महान
माँ की अमिट पवित्रता की
अब भी कसमें खाई जाती हैं
पर यह है दुर्भाग्य हमारा
माँ के जल में गटर मिला दी जाती हैं

माँ ने हमेशा हमें बेटा समझा
पर हम श्रवण नहीं बन पाये है
हम केवल कलयुगी बेटे बनकर
माँ को छलते आये हैं
सौगंध सबे है माँ गंगे की
माँ के जल को स्वच्छ बनायें हम
जल मैया का अमृत सा है
इसे बचाने आयें हम

पर जो कर के ऊपर कर रख कर बैठे हैं
मेरी ललकार सुने अब वह
माँ की खातिर कुछ न कर पाये
ऐसे लोगों पर धिक्कार सुने अब वह
माँ ने जो हमें ममता दी है
उसका कुछ तो सम्मान करें अब हम
मैया का जल अमृत सा है
इसे बचानेें का अनुसंधान करें अब हम

दुर्गेश कुमार सराठे
03/10/17

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