लगता है चुनाव है???

जिसने कभी बात न की हो
कभी न रुख किया हो सम
वे आकर कहते हैं अब
और दुर्गेश कैसें हो तुम
यह सब जो बदलाव है
लगता है चुनाव है

कभी न ऐसे पास में बैठे
हमेशा लगता था जैंसे हो ऐंठे
कभी निकलते न थे जिनके बोल
वे लिये मंजीरा पीटे ढोल
उन पर कैंसा यह प्रभाव है
भैया लगता है चुनाव है

कटु भाषी भी मृदुलता औढ़े
बड़े-बड़े अकड़ू देखो कैंसे
दिखते हैं दोनों कर जोड़े
मुख से निकले जनाब ओ श्रीमान
मुर्गे भी अब कीटों का
देखो कैंसा करते हैं सम्मान
यह सब जो बदलाव है
भैया लगता है चुनाव है

अब सबके सब सज्जन हो गए
बोट जुटाबे की खातिर अब
सबरे बोटरपूजा में खो गए
और बादे भी बड़े-बड़े अब हो गए
भैया जो सब सत्ता को प्रभाव है
लगता है चुनाव है

रचियेता
दुर्गेश कुमार सराठे
29/10/2017

Comments

  1. हर मतदाता के मन की बात को शब्दों में पिरो दिया है तुमने भाई

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  2. धन्यवाद शिवम भाई

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  3. Excellently written Durgesh

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