तुम साथ होते तो
तुम साथ होते तो,
सफर बातों बातों में कट जाता|
यूँ दुख से आहत ना होता..,
थोड़ा थोड़ा बट जाता|
भले अंधेरे में चलते,
पर पुंज हृदय में पट जाता|
अरे रात को चलने देते,
सुबह अंधेरा छट जाता|
मेरे मन तुम ना भागे होते,
मैं पावक में डट जाता|
अरे तनिक रुक तो जाते,
स्वयं लुटेरा हट जाता|
हृदय में यूँ दंस ना होते,
पीयूष हृदय में रट जाता|
गरल अगर मैं पी जाता,
सबकुछ वहीं सिमट जाता|
ना फिर तुम वागी होते,
रुदन तुम्हारा घट जाता|
दुर्गेश कुमार सराठे
Bahut acche
ReplyDeleteआभार भैया
Deletebahut hi khoobsurat rachna hai bhaiya
ReplyDeleteआभार अमन
Deleteआभाद दीदी
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