Valentine's day

वैलेंटाइनडे का जो प्रचलन भारत में हो रहा है वह उसका अपभ्रंश रूप है|...,
वास्तविक वैलेंटाइनडे का अस्तित्व ही समाप्त है|
और इसे प्रेमदिवस से अनुवादित कर दिया गया है,वह भी अपूर्ण मानसिकता का परिचायक है|
इसका प्रेमदिबस से कोई प्रत्यक्ष सम्बंध नहीं है.. यह यूरोप की खण्डित परम्परा से निकल कर आया है.. जहाँ तक मैं खोज पाया हूँ..| मुझे पता चला कि यूरोप में एक व्यक्ति हुए थे| वैलेंटाइन,वह (लिव-एण्ड-रिलेशनसिप) परिणय पूर्व रति के विरोधी थे और इसका प्रचार प्रसार करते थे.. उनके इस कार्य को वहाँ के जो सम्राट थे (क्लोडियस)  उन्होंने. यूरोप परम्परा का अवरोधक माना और वैलेंटाइन को 14 फरवरी 498 को फाँसी पर लटका दिया.. इससे दुखी होकर उनके समर्थक युगलों ने एक दूसरे को,गुलाब देकर वैलेंनटाइन को याद किया और उनके विचारों को मानने का वादा किया तब से इस वैलेंटाइनडे का प्रारम्भ हुआ....|
और हम इसका उल्टा कर रहें...|  ना जानें किस किस नाम से इसे प्रचारित किया जा रहा है, प्रेम दिबस ,प्रेम चौदस,और भी ना जानें क्या क्या|
हो सकता है मेरी जानकारी गलत हो...,इसलिए क्षमा सहित....
दुर्गेश कुमार सराठे

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

चिमनी

बचपन का मित्र

हे भगवान बनवा दो पटवारी