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सन्ध्या काल का शांत जलाशय

शांत जलाशय का पानी मन में हिलोरे लेता है दावानल सा उबल रहा है मुझसे कुछ कहता है सूरज की लालिमा में रंगकर रक्तिम स्वरूप दिखाता है अपने शांत रूप में भी मानो क्रोध हमे बतलाता है सूरज जब धीरे-धीरे ढलता है नभ मानो ठण्डी अग्नि सा जलता है शांत पवन है, शांत मेरा मन है जलाशयके ऊपर न पंछी कोई टहलता है जब सूरज की रक्तिम किरणें पानी में आती हैं जलाशय का पूरा पानी रक्तिम सा कर जाती हैं शांत जलाशय को देख हृदय में नूतन दृश्य अंकुर लेता है शांत जलाशय मुझसे कुछ कहता है सन्ध्या काल की यह बेला शांत जलाशय मैं अलबेला ऐंसा लगता है मानो हृदय गति रुक आई हो ऐसी पावन बेला में कोई बासंती पुरवाई हो पवन भी शांत बैठकर,जलाशय के तट पर दिन भर थककर निद्रा लेने आई हो लहर जलाशय की सोई सी है,पंछी डाली पर बैठ गए लगता है जैंसे प्रकृति में मादकता छाई हो प्रकृति में एक अजब सी खामोशी है कण-कण में लगता है यह कैंसी मदहोशी है भीनी-भीनी गंध फैलती है तन-मन में लगता है कोई प्रेम प्रसंग की पुरवाई हो हम सब पाहुन वन बैठे हैं मानो सूरज की किरणें लाल पुष्प ले आई हो यह सब दृश्य देख ऐंसा लगता है मानो जैंसे प...

दुश्मन

आज के दोस्त बढ़े मतलबी होते हैं अक्सर दोस्त को जब याद करते हैं तब वह किसी काम के होते हैं बरना कौन कहाँ दोस्ती निभाता है जब काम न होता मित्रों से तब तक कहाँ दोस्त याद आता है जर...

वासना

कहते हैं लोग होता प्यार पूरा नहीं लैकिन मुझे प्यार की परिभाषा ही समझ न आती है क्यों लोग करते हैं ऐसा प्यार जिसके पूरा होने में कुदरत भी साथ न निभाती है आखिर कार कैंसे होता यह ...

दुख

आज कुछ कविता लिखने का मन नहीं है, आज तो वह लिख रहा हूँ जो एक लेखक लिखने की कोशिश करता है  जब हम कभी बहुत दुखी होते हैं, और मन में किसी बात को लेकर अंतरद्वन्द चल रहा होता है तब मन बढ...

चौराहा कुछ तो कहता है

चार अलग राहों का मिलन और सब लोगों का आवागमन नियमों की खाल उधड़ती और संस्कारों का नंगा बदन सीधी-सीधी सड़कों पर भी लोगों का आड़ा-टेड़ा चलन यह सब देख चौराहा हँसता रोता है यह चौ...

गीत

इस तरह किसी को यह, दिन दिखाई न दे ए खुदा तू किसी को दोस्त की जुदाई न दे मेरे जाने से पहले उठा न उन्हें कोई बाप अपने  बेटे को अंतिम विदाई न दे ये खुदा तू किसी को दोस्त की जुदाई न दे ...

अरे अठारह स्वागत है तेरा

नये बर्ष तू आया है इन शीतलता लिये बहारों में स्वागत है तेरा अरे अठारह मेरे मन के फुलवारों में तू आशा की नई किरण वन बिखरजा सूने गलियारों में निराशित मन में तू आशा भर दे टूट चु...