गीत
इस तरह किसी को यह, दिन दिखाई न दे
ए खुदा तू किसी को दोस्त की जुदाई न दे
मेरे जाने से पहले उठा न उन्हें
कोई बाप अपने बेटे को अंतिम विदाई न दे
ये खुदा तू किसी को दोस्त की जुदाई न दे
इस तरह किसी को यह दिन दिखाई न दे
बहन की राखी से, कलाई तू सूनी न कर
माँ की आँखों में, इस तरह रुलाई न दे
ए मेरे प्रभु तू, सुन तो सही
इस तरह किसी को दोस्त की जुदाई न दे
बाप से पहले बेटे को, उठा न कभी
बाप को यूँ, जग हंसाई न दे
ए खुदा तू किसी को दोस्त की जुदाई न दे
ऐसा दिन किसी और को अब दिखाई न दे
अब तो टूट चुका हूँ, सबके जाने से में
अब तो तू, दोस्तों की जुदाई न दे
दुर्गेश कुमार सराठे
06/01/18
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