दुश्मन
आज के दोस्त बढ़े मतलबी होते हैं
अक्सर दोस्त को जब याद करते हैं
तब वह किसी काम के होते हैं
बरना कौन कहाँ दोस्ती निभाता है
जब काम न होता मित्रों से
तब तक कहाँ दोस्त याद आता है
जरा सावधान रहना ए दोस्त
जो रोक सके गलत करने से
असल में वे दोस्त होते हैं
वरना लोग चढ़ाये जाते हैं
चने के झाड़ पर
ऐसे दुश्मन भी दोस्त होते हैं
दोस्त के वेश में कब दुश्मन आ जाये
न जाने कब दगा करेे और चला जाये
ऐसे दुश्मन दिखते हैं दोस्त
पर दोस्त दोस्त नहीं होते
दुर्गेश कुमार सराठे
Comments
Post a Comment