तुम साथ होते तो, सफर बातों बातों में कट जाता| यूँ दुख से आहत ना होता.., थोड़ा थोड़ा बट जाता| भले अंधेरे में चलते, पर पुंज हृदय में पट जाता| अरे रात को चलने देते, सुबह अंधेरा छट जाता| मेरे मन तुम ना भागे होते, मैं पावक में डट जाता| अरे तनिक रुक तो जाते, स्वयं लुटेरा हट जाता| हृदय में यूँ दंस ना होते, पीयूष हृदय में रट जाता| गरल अगर मैं पी जाता, सबकुछ वहीं सिमट जाता| ना फिर तुम वागी होते, रुदन तुम्हारा घट जाता| दुर्गेश कुमार सराठे