कविता
अन मना सा मन हुआ क्यों?
किसने दिल पर चोट जड़ी|
चाँद धरा पर आते-आते,
तुम पर कैंसे ओट पड़ी?
किसने दिल पर चोट जड़ी|
चाँद धरा पर आते-आते,
तुम पर कैंसे ओट पड़ी?
कहो ना कुछ तो मन के भँवरे,
किन पुष्पों ने घात किया?
हृदय भीतर तीर चलाया,
उरवन में उत्पात किया?
किन पुष्पों ने घात किया?
हृदय भीतर तीर चलाया,
उरवन में उत्पात किया?
ऐसे डर कर चुप से क्यों हो?
खिले खिले से रहने वाले|
मौन औढ़ कर क्यों बैठो हो?
पल पल में कुछ कहने वाले|
खिले खिले से रहने वाले|
मौन औढ़ कर क्यों बैठो हो?
पल पल में कुछ कहने वाले|
हँसते खिलते से अधरों पर,
मौनी भूषण नहीं सजाते|
वन उपवन के रहने वाले,
गमलों में कभी ना रह पाते|
मौनी भूषण नहीं सजाते|
वन उपवन के रहने वाले,
गमलों में कभी ना रह पाते|
सजल सुनों तुम मन की पीड़ा,
लैकिन बिखर नहीं जाना|
जितना किस्मत तुम्हें सताये,
उतना तुम्हें निखर कर आना|
लैकिन बिखर नहीं जाना|
जितना किस्मत तुम्हें सताये,
उतना तुम्हें निखर कर आना|
दुर्गेश कुमार सराठे सजल
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