चौराहा कुछ तो कहता है
चार अलग राहों का मिलन
और सब लोगों का आवागमन
नियमों की खाल उधड़ती
और संस्कारों का नंगा बदन
सीधी-सीधी सड़कों पर भी
लोगों का आड़ा-टेड़ा चलन
यह सब देख चौराहा हँसता रोता है
यह चौराहा कुछ तो कहता है?
कैंसे सबको एक सूत्र में बाँधा जाता है
कैंसे सब पथकों को साधा जाता है
आने-जाने वाले सब लोगों को कैंसे अपनाया जाता है
सही राह पर चलना कैंसे बतलाया जाता है
कई अगले-पगले दम्भी लोगों को
कैंसे राहों पर हकवाया जाता है
वह इन सबको यूँ झेलता रहता है
यह चौराहा कुछ तो कहता है
दुर्गेश कुमार सराठे
11/01/18
11:15
Ohhh
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