21वी शदी का प्रभाव

स्नेह विरक्त हुआ अब हृदय
वह मधुर सम्बन्ध कहाँ है
यह  21वी  शदी है यारो
अब वह प्रेम के बंध कहाँ है

लोगों के हृदय में कटुता है
मन में छल के भाव हैं
नयनों से लज्जा गायब है
मर्यादा के आभाव हैं

जन साधारण के मन में
साधारणता नहीं है
हर जगह है तो केवल
मृगतृष्णा सा प्रभाव है

परिवारों में एकलता आई
संयुक्तता अब  बोराई
हर एक जन के मन व तन पर
पाश्चात्य विचारों की परछाई

गाँवों से आँगन गायब है
रसोईघरों से चूल्हे गायब
औंटों, टिपटी के आभाव हैं
यह 21वी शादी का प्रभाव है

आँगन की तुलसी मुरझाई
लोगों ने सरम बेच कर खाई
सब कुछ उलट-पलट दिया इसने
यह कैंसी आधुनिकता की पुरवाई

रिश्तों में दूरी बहुत है
दूर हुआ सद्भाव है
यह सब तो यारो बस
21वी शदी का प्रभाव है

दुर्गेश कुमार सराठे

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