यार जब हम बड़े हो जायेंगे

यह दोस्तों का बुद्धू कहना
हर वक्त एक दूजे की टांग
खींचते रहना
यह एक दूजे को
हर कुछ कह देना
दोस्त के हाथों से
पानी की बॉटल छीन
कर पानी पी लेना

दोस्त अगर पानी की बॉटल लाये
मगर उसे पानी न पीने देना
अपनी न सुनने पर
उसको गाली देना
यह सब कुछ
आगे बढ़े याद आयेंगे
यार जब हम बड़े हो जायेंगे

वह चूना भट्टी चौराहे की चाय
प्रशांत भाई की बड़ी गजब की राय
विकास भाई का बुध्दू कहना
आशुतोष के संग  बस में आना-जाना
बह राज भाई के गीतों को
सुनने को उत्सुक रहना
और इन सब मित्रों के आगे
स्वयं को बड़ा सूरमा कहना
यह सब क्रम जब भी याद आयेंगे
यार हमें बड़ा सतायेंगे
जब हम बड़े हो जायेंगे

दुर्गेश कुमार सराठे

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