प्यार

कहते हैं लोग प्यार कभी पूरा होता नहीं
मगर, कभी आधा भी नजर न आया है
प्यार का पहला अक्षर अधूरा है मगर
यार तो फिर भी पूरा है
यार से गुलशन होता है प्यार
अगर यार है तो काहे का अधूरा है
हाँ मगर प्यार किसी तप से कम नहीं
ऐसा किसी का प्यार बता तो जहाँ गम नहीं
प्यार तो खुदा की बंदगी है
प्यार ही इस जग में सच्चा बाकि सब गंदगी है
अगर प्यार नहीं है आँखों में
तब आंखे नेत्र नहीं पाहन की तरह अचल है
अगर प्यार नहीं है जग में
तो वह गरल भरा कमल है
मैं कब कहता हूँ प्यार करो प्रेमिका को
मित्रों से भी प्रेम किया जाता है
प्यार यदि सफल हुआ है तो
वह निश्चित ही स्वर्ग निर्माता है
प्रेमी हो या सुरबाला सबके उर में
निर्मल जल सी वह रसधार बहे
हृदय भरा रहे निर्मल अनुरागों से
न मलिन भावनाओं का व्यापार रहे
प्यार हमेशा रहा अधूरा लैकिन पूरा भी होता है
गर नहीं है कामी लोलुपता
तब प्यार अनुराग से पूरा होता है

दुर्गेश कुमार सराठे

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