अंधकारवादिता
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
आओ दोस्तों आज बताये,
उन अंघे बहरे लोगों को जो|
सुन पाये न देख सके,
जन -जन के असह दुखों के ठेरों को|
एक तरफ नेता जी अरब पति,
और एक तरफ गंगू सा तेली|
नेता सबरे मौज उड़ा रहे,
जनता खड़ी राशन की लाइन में डेली|
बढ़े- बढ़े सब शासन कर रहे,
ऐसी जा बेईमानी|
नेता सबरे राजा हो गये|
जनता भर रही पानी|
लोकतंत्र में भृष्टतंत्र घुस गओ,
सब हो गये अब फैल|
जनता बिचारी मारी फिर रई,
ऐसे राजनीति के खेल|
चंद्रगुप्त, अशोक, विक्रम,
राजा भोज किते चले गये |
हर पद में घुस गई वेईमानी |
उल्लू, गिरगिट, शासन कर रहे,
लुप्त भये सबरे ज्ञानी |
धीरे -घीरे जनता की आशा मर गयी ,
सूख गओ अखियों को पानी|
घर से बेघर जनता हो गई,
रो रहे अच्छे ज्ञानी|
📖रचियेेता📖
🌞दुर्गेश कुमार सराठे 🌞
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