हे माँ केवल मेरी गुस्ताखी को जो देखो वह चित पर धरता है खुद की गुस्ताखी को न देखे पर मेरी एक छोटी-सी गलती पर जो देखो वही बड़ा अकड़ता है गलती चाहे उनकी ही हो पर शिकायत मेरी करता है जो देखो वही शिकायत करता है माना कि मैं थोड़ा अड़ियल हूँ आसानी से न माने ऐसा पत्थर बड़ा अचल हूँ पर बाहर कितनी भी सख्ती बरतुँ पर माँ तुम्हें पता है मैं तो तेरी पूजा का नरियल हूँ मैं भले किसी को त्रास न दूँ पर हर कोई मुझे त्रासित करता है जो देखो वही शिकायत करता है क्या माँ यह मेरा भोलापन है या फिर दुनिया का अपनापन है पर इस दुनिया ने फूल दिखाकर काँटा मुझे दिया हरदम और दुनिया को लावण्यमयी समझे दुनिया से प्रेमास लगाये बैठे थे हम यहाँ हर कोई केवल लोगों को अपने झूठे मोह में डुबाने का प्रयास करता है जिसे देखो वही मुफ्त का खाने का प्रयास करता है माँ यह दुनिया गजब बनाई तूने जो वेचारे असहाय हैं हर कोई पागल उसे सताने का प्रयास करता है यहाँ बिना हाथ वाले काम करने में लगे हैं और हाथ है जिनके बह औरों से आस करता है हे माँ लोग अपनी देखते नहीं खुद आखिर क्या हैं औरों को देखने में लगा ह...