छुआछूत के बंधन तोड़ो
छुआछूत के बंधन तोड़ो,
ऊँच नीच की माला|
जातिवाद का किला ढहा दो,
फैले नया उजाला|
मानव मानव मन के मन में,
कोई द्वेष रहे ना|
प्रेम हृदय में भर जाने दो,
नफ़रत कहीं बहे ना|
कभी राम ने बेर भखे थे,
झूठे माता सबरी के|
हम भी सबको गले लगायें,
रत दें पल खुश खबरी के|
दुर्गेश कुमार सराठे सजल
पुरैना कलाँ बनखेड़ी होशंगाबद मध्यप्रदेश
8819930876
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