समय समय की बात है

वर्तमान समय में जिस तरह पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण कर रहे हैं, वह एक दिन मानव को केवस हाड़ माँस का पुतला बनाकर ही छोड़ेगी| और कुछ को तो बना भी दिया है|
इसके कुछ उदाहरण हमारे समक्ष आय दिन दृष्टव्य भी हो रहे हैं| ऐसी अनेक घटनाएं प्रतिदिन काल के पटल पर घटित हो रही हैं,जो ना सिर्फ निंदनीय हैं अपितु मानवता का परिहास भी कर रही हैं| नैतिकता का दमन नित्य नवीन मार्गों से हो रहा है| प्रत्येक स्तर पर नैतिक मूल्यों में गिरावट चिंताजनक स्थिति निर्मित कर रही है| आज जहाँ माता-पिता का शीश गर्व से उठना चाहिए था वहीं कुछ निर्लज्ज संतानों की वजह से उनका मस्तक धूल में लोट रहा है| माता-पिता को साक्षात ईश्वर का रूप कहा जाता है वहाँ उनका इतना तिरस्कार बहुत ही अशोभनीय है| आखिर एक संतान का पालन पोषण उन्हीं माता-पिता के द्वारा किया जाता है जिनका तिरस्कार आज वही संतान कर रही है| और वजह क्या है,बहुत छोटी छोटी बातें| किसी को उसकी पसंद का काम करने से मना कर दिया, बस फिर क्या था ,माँ-बाप ही उनके लिए सबसे बड़े शत्रु हो गए| आखिर माता-पिता अपने कर्तव्य का ही तो पालन कर रहे थे| इस लिहाज से तो संतान को अपने संतानहोने के कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए था| नाकि माता-पिता का अपमान| जिन माता-पिता ने यह जीवन दिया,इतना श्रेष्ठ रूप दिया बाँकी भौतिक सुख सुविधा दी,उनका तिरस्कार मात्र इसलिए की उन्होंने संतान को अपने मन की नहीं करने दी| कोई भी माता-पिता कभी अपनी संतान का बुरा नहीं कर सकता| वह तो हमेशा भलाई ही करने की सोचते हैं| और यदि उनका यह अतिअनुराग संतान को अन्याय लगता है| तब माता-पिता को तो संतान से प्राण तक माँग लेने का अधिकार है,क्योंकि एक माता-पिता ही होते हैं| जो संतान को जीवन देते हैं,यदि वह ना पालें तो कैंसे कोई अपना अस्तित्व पा सकता है| और फिर हमारी संस्कृति में तो कितने बड़े बड़े मातृ-पितृ भक्त हुए हैं| भगवान श्री राम जो पिता के वचन का मूल्य रखने के लिए वन का वरण सहर्ष कर लेते हैं| श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को काँवर में लेकर पैदल तीर्थयात्रा करा देते हैं| ऐसे कितने ही श्रेष्ठ पुरूष हमारी सभ्यता संस्कृति को शुशोभित करते रहे हैं| किंतु आज स्थिति बिल्कुल उलट है| एक पिता को अपनी कुसंतान के कारण प्राण त्यागना पड़ता| एक माँ को संसार की यातनाएं उठानी पड़ती हैं| क्या हो गया है हमारे इस संवेदनशील समाज को?

दुर्गेश कुमार सराठे सजल

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